Alwar News: अलवर जिला पर्यटन के लिहाज से अपनी खास पहचान रखता है, जहां हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक धरोहर और वन्यजीवों की समृद्धि यहां आने वाले लोगों को खास अनुभव देती है. खासतौर पर सिलीसेढ़ झील और सरिस्का टाइगर रिजर्व पर्यटकों की पहली पसंद बने हुए हैं.

अलवर.
 अलवर जिला पर्यटन के लिहाज से अपनी खास पहचान रखता है, जहां हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक धरोहर और वन्यजीवों की समृद्धि यहां आने वाले लोगों को खास अनुभव देती है. खासतौर पर सिलीसेढ़ झील और सरिस्का टाइगर रिजर्व पर्यटकों की पहली पसंद बने हुए हैं. शांत वातावरण, हरियाली और वन्यजीवों की मौजूदगी के कारण ये दोनों स्थल अलवर को पर्यटन मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान दिलाते हैं.

हाल ही में सिलीसेढ़ झील को रामसर साइट घोषित किए जाने के बाद यह प्रकृति प्रेमियों के लिए और भी बड़ा आकर्षण बन गई है. झील पर बर्ड सेंचुरी विकसित करने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है. इसी कड़ी में हाल ही में यहां अलवर बर्ड फेस्टिवल का आयोजन किया गया, जिसमें प्रकृति संरक्षण और पक्षी पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया.
सर्दियों में प्रवासी पक्षियों का बनता है ठिकाना
सरिस्का टाइगर रिजर्व के निकट स्थित सिलीसेढ़ झील हर साल सर्दियों में 200 से अधिक प्रजातियों के देशी-विदेशी पक्षियों का आश्रय बन जाती है. सरिस्का का घना जंगल, पर्याप्त जल स्रोत और अनुकूल तापमान इन प्रवासी पक्षियों के लिए आदर्श वातावरण प्रदान करता है. यहां बार-हेडेड गूज, ग्रेलेग गूज, ब्राह्मणी डक (सुरखाब), पेंटेड स्टार्क, स्पून बिल, कॉमन टील, यूरेशियन विगन, गोल्डन ओरियोल और इंडियन पिटा सहित कई प्रजातियां देखी जाती हैं. ये पक्षी साइबेरिया, कजाकिस्तान और तिब्बत जैसे दूरस्थ क्षेत्रों से हजारों किलोमीटर की यात्रा कर यहां पहुंचते हैं.